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आप विदेशी मुद्रा का व्यापार कहां कर सकते हैं

आप विदेशी मुद्रा का व्यापार कहां कर सकते हैं
भारत और न्यूजीलैंड के बीच अभी कितना व्यापार हो रहा है और अगले 5 वर्षों में इसे आप कहां देखते हैं?

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एफटीए के बाहर व्यापार कर सकता है न्यूजीलैंड

कुछ साल पहले भारत और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने के करीब थे, पर भारत सौदे से बाहर हो गया। न्यूजीलैंड के व्यापार, निर्यात वृद्धि और कृषि मंत्री डेमियन ओ'कॉनर ने संजीव मुखर्जी से कहा कि डेरी उनके देश की सबसे बड़ी निर्यात सामग्री है। संपादित अंश..

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार समझौता हो गया है। आपको क्यों लगता है कि भारत और न्यूजीलैंड बातचीत करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं?

जाहिर है, डेरी भारत का एक बड़ा मुद्दा है और यहां इसका सबसे बड़ा क्षेत्र है और हम न्यूजीलैंड में भी डेरी के सबसे बड़े निर्यातक हैं। भारत में यह सबसे संवेदनशील मुद्दा भी है। लेकिन, हमारा मानना है कि डेरी उद्योग में भागीदारी के अवसर हैं जो दोनों देशों के मूल्यों पर आधारित होंगे। यह केवल डेरी में वस्तुओं का व्यापार नहीं है, बल्कि यह प्रौद्योगिकी, तकनीकों को साझा कर भारतीय डेरी उद्योग की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता कर सकता है।

इन देशों में इस्तेमाल कर सकते हैं भारत की करेंसी

indian currency

भारतीय मुद्रा को जिम्बाब्वे ने घोषित किया है लीगल टेंडर मनी।

  • कई अर्थव्यवस्थाएं अपने देश में करती हैं भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल।
  • जिम्बाब्वे ने भारतीय रुपये को अपना लीगल टेंडर मनी घोषित किया है।भारत के व्यापारी को एक भारतीय रुपये के बदले ज्यादा नेपाली मुद्रा मिलती है।
  • भारत के व्यापारी को एक भारतीय रुपये के बदले ज्यादा नेपाली मुद्रा मिलती है।

2. नेपाल
नेपाल एक ऐसा देश है जिसे भारत का ही एक अभिन्न अंग कहा जाए तो गलत नहीं होगा। नेपाल ने दिसम्बर 2018 से 100 रुपये से बड़े मूल्य के भारतीय नोटों को बंद कर दिया है लेकिन 200 रुपये से कम के नोट बेधड़क स्वीकार किये जा रहे हैं। जब 2016 में भारत ने नोटबंदी की थी तब वहां पर लगभग 9.48 अरब रुपये मूल्य के भारतीय नोट इस्तेमाल किए जा रहे थे। भारत के व्यापारी नेपाल से व्यापार करने को उत्सुक रहते हैं क्योंकि भारत के व्यापारी को एक भारतीय रुपये के बदले ज्यादा नेपाली मुद्रा मिलती है।

Explainer : क्‍यों कोई देश जानबूझकर कमजोर बनाता है अपनी करेंसी, कहां और कैसे होता है इसका फायदा?

डॉलर अभी 22 साल की सबसे मजबूत स्थिति में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 24, 2022, 15:30 IST

हाइलाइट्स

अपनी करेंसी को जानबूझकर कमजोर करने का कारनामा हाल में ही चीन दो बार कर चुका है.
एक बार 2015 में चीन ने डॉलर के मुकबाले अपने युआन की कीमत घटाकर 6.22 कर दी थी.
साल 2019 में फिर चीन ने डॉलर के मुकाबले युआन की कीमत घटाकर 6.99 तय कर दी.

नई दिल्‍ली. अमूमन किसी देश की करेंसी के कमजोर होने को उसकी बिखरती अर्थव्‍यवस्‍था का सबूत माना जाता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि कुछ देश जानबूझकर अपनी मुद्रा को कमजोर बनाते हैं. एक बारगी तो इस बात पर यकीन करना मुश्किल होता है कि जहां दुनियाभर के देश अपनी मुद्रा को मजबूत बनाने की जुगत में लगे रहते हैं, वहीं कोई देश क्‍यों अपनी करेंसी को कमजोर बनाएगा, लेकिन यही सवाल जब बाजार और कमोडिटी एक्‍सपर्ट से पूछा तो जवाब चौंकाने वाले थे.

आईआईएफएल सिक्‍योरिटीज के कमोडिटी रिसर्च हेड अनुज गुप्‍ता का कहना है कि ज्‍यादातर ऐसे देश अपनी करेंसी को जानबूझकर कमजोर बनाते हैं, जिन्‍हें निर्यात के मोर्चे पर लाभ लेना होता है. यानी अगर किसी देश की करेंसी कमजोर होती है, तो उसी अनुपात में उसका निर्यात सस्‍ता हो जाता है और उद्योगों के पास ज्‍यादा उत्‍पादन के मौके बनते हैं. दरअसल, ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि ज्‍यादातर ग्‍लोबल लेनदेन डॉलर में होता है और जब किसी देश की मुद्रा कमजोर होती है तो उसका उत्‍पादन भी डॉलर के मुकाबले सस्‍ता हो जाता है और ग्‍लोबल मार्केट में उसकी मांग बढ़ जाती है.

चार सप्ताह बाद विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा में इजाफा, जानें कितना है स्वर्ण भंडार

मुंबई: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने एक बार फिर से भारतीय बाजार का रूख किया है। इसका असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखा। 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.4 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इससे पहले लगातार चार सप्ताह तक इसमें कमी हुई थी।

चार सप्ताह बाद आई यह खबर

29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान शेयर बाजार में लगभग हर रोज तेजी रही। उस सप्ताह फॉरेन पोर्टफोलियो इंस्वेस्टर्स (FII) नेट इनवेस्टर (Net Investor) थे। रिजर्व बैंक से मिली सूचना के अनुसार 29 जुलाई 2022 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 573.875 अरब डॉलर पर पहुंच गया। बीते 15 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान अपना विदेशी मुद्रा भंडार 7.541 अरब डॉलर घटा था। यदि 22 जुलाई को आप विदेशी मुद्रा का व्यापार कहां कर सकते हैं समाप्त सप्ताह की बात करें तो यह 571.5 अरब डॉलर पर था। आठ जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार 8.062 अरब डॉलर घटकर 580.252 अरब डॉलर रह गया था। इसी महीने एक जुलाई को भी विदेशी मुद्रा भंडार 5.008 अरब डॉलर घटा था। उस समय अपना विदेशी मुद्रा भंडार 588.314 अरब डॉलर पर था।

29 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में जो बढ़ोतरी हुई, उसमें फॉरेन करेंसी असेट का बढ़ना भी शामिल है। यह कुल मुद्रा भंडार का आप विदेशी मुद्रा का व्यापार कहां कर सकते हैं एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा स्वर्ण आरक्षित भंडार बढ़ने से भी विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी किये गये भारत के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) 1.121 अरब डॉलर बढ़ कर 511.257 अरब डॉलर पर पहुंच। बीते 22 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान इसमें 1.426 अरब डॉलर में कमी हुई थी। अमेरिकी डॉलर में अभिव्यक्त विदेशी मुद्रा भंडार में रखे जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में मूल्यवृद्धि अथवा मूल्यह्रास के प्रभावों को शामिल किया जाता है।

स्वर्ण भंडार में भी इ़़जाफा

आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य भी 1.140 अरब डॉलर बढ़ कर 39.642 अरब डॉलर पर पहुंच गया। समीक्षाधीन सप्ताह में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी 2.2 करोड़ डॉलर बढ कर 17.985 अरब डॉलर पर चला गया। आईएमएफ में रखे देश का मुद्रा भंडार भी 3.1 करोड़ डॉलर बढ़ कर 4.991 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

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रुपया 35 पैसे टूटकर 81.26 प्रति डॉलर पर

मुंबई, 16 नवंबर (भाषा) निराशाजनक व्यापार आंकड़ों तथा विदेशी कोषों की निकासी के कारण अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को अमेरिकी मुद्रा की तुलना में रुपया 35 पैसे की गिरावट के साथ 81.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर होने से रुपये की विनियम दर में गिरावट आई।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 81.41 पर खुला। कारोबार के दौरान रुपया 81.23 के दिन के उच्चस्तर तक गया और 81.58 के निचले स्तर तक आया।

अंत में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 35 पैसे की गिरावट के साथ 81.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पिछले कारोबारी सत्र में आप विदेशी मुद्रा का व्यापार कहां कर सकते हैं 37 पैसों की तेजी के साथ 80.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

शेयरखान बाय बीएनपी पारिबा में शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा और कमजोर एशियाई मुद्राओं के कारण भारतीय रुपये में गिरावट आई है। एफआईआई की निकासी से भी रुपया प्रभावित हुआ।’’

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