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टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है

टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है
क्या है SWIFT? जिसको लेकर मिल रही है रूस को धमकी

क्या है SWIFT? जिसको लेकर मिल रही है रूस को धमकी, रूस पर स्विफ्ट प्रतिबंध अन्य देशों को कैसे प्रभावित करेगा

What Is SWIFT Ban: स्विफ्ट से रूसी बैंकों को बाहर करने से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों तक देश की पहुंच प्रतिबंधित हो जाएगी. रूसी कंपनियों और व्यक्तियों को आयात के लिए भुगतान करना और निर्यात के लिए नकद प्राप्त करना, उधार लेना या विदेशों में निवेश करना कठिन होगा.

क्या है SWIFT? जिसको लेकर मिल रही है रूस को धमकी

क्या है SWIFT? जिसको लेकर मिल रही है रूस को धमकी

शताक्षी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2022,
  • (Updated 28 फरवरी 2022, 3:22 PM IST)

एक सुरक्षित मैसेजिंग सिस्टम है SWIFT

SWIFT ने 2020 में € 36 मिलियन का लाभ कमाया

रूस का यूक्रेन पर हमला लगातार तेज़ होता जा रहा है. इस बीच अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए है. ऐसा माना जा रहा है कि इन प्रतिबंधों के चलते रूस पर आर्थिक संकट मंडरा सकता है. वहीं यूक्रेन भी लगातार रूस को SWIFT से बाहर करने की गुहार लगा रहा है. हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने से पहले कई देशों को अपने हितों की चिंता भी सताने लगी है.टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है

SWIFT एक वैश्विक बैंकिंग प्रणाली है. रूस को कई बार इससे प्रतिबंधित करने की धमकी दी जा चुकी है. जब 2014 में क्रीमिया पर कब्जा टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है करने के बाद अमेरिका ने रूस को स्विफ्ट से अलग करने की मांग की थी. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ये SWIFT क्या है.

स्विफ्ट क्या है?
स्विफ्ट (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunications) एक सुरक्षित मैसेजिंग सिस्टम है, जो जीमेल की तरह काम करता है. इसकी स्थापना 1973 में टेलेक्स सिस्टम पर निर्भरता को खत्म करने के लिए किया गया था. इसका उपयोग टेक्स्ट मैसेज भेजने के लिए किया जाता है. SWIFT 200 से ज्यादा देशों में 11 हजार से ज्यादा फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और कंपनीज के बीच मैसेजिंग को सेफ्टी प्रदान करता है.
इसकी खासियत ये है कि इसके जरिए एक दिन में लगभग 4 करोड़ मैसेज भेजे जा सकते हैं. जिनमें बैंकिंग कार्यप्रणाली से जुड़े विवरण शामिल हैं. हर साल, सिस्टम का उपयोग करके खरबों डॉलर ट्रांसफर किए जाते हैं

कौन है स्विफ्ट का मालिक ?
स्विफ्ट 1970 के दशक में स्थापित हजारों सदस्य संस्थानों का एक सहकारी है, जो सेवा का उपयोग करता है. 2020 की वार्षिक समीक्षा के अनुसार, बेल्जियम में स्थित, SWIFT ने 2020 में € 36 मिलियन का लाभ कमाया. यह मुख्य रूप से अपने सदस्यों की सेवा के रूप में चलाया जाता है

स्विफ्ट बैन इतना गंभीर क्यों है?
स्विफ्ट से रूसी बैंकों को बाहर करने से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों तक देश की पहुंच प्रतिबंधित हो जाएगी. रूसी कंपनियों और व्यक्तियों को आयात के लिए भुगतान करना और निर्यात के लिए नकद प्राप्त करना, उधार लेना या विदेशों में निवेश करना कठिन होगा.
रूसी बैंक भुगतान के लिए अन्य चैनलों जैसे फोन, मैसेजिंग ऐप या ईमेल का उपयोग कर सकते हैं. यह रूसी बैंकों को उन देशों में बैंकों के माध्यम से भुगतान करने देगा जिन्होंने प्रतिबंध नहीं लगाए हैं, लेकिन चूंकि विकल्प कम कुशल और सुरक्षित होने की संभावना है, लेनदेन की मात्रा गिर सकती है और लागत बढ़ सकती है.

रूस पर स्विफ्ट प्रतिबंध अन्य देशों को कैसे प्रभावित करेगा?
निर्यातकों को रूस को माल बेचना जोखिम भरा और अधिक महंगा लगेगा. रूस विनिर्मित वस्तुओं का बड़ा खरीदार है. विश्व बैंक के आंकड़ों के आधार पर नीदरलैंड और जर्मनी इसके दूसरे और तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार हैं, हालांकि रूस किसी भी देश के लिए शीर्ष 10 निर्यात बाजार नहीं है. रूसी सामानों के विदेशी खरीदारों को भी इसे और अधिक कठिन लगेगा, हालांकि उन्हें दूसरे विकल्पों के लिए प्रेरित किया जाएगा, लेकिन फिर भी जब रूसी तेल और गैस की बात आती है, तो विदेशी खरीदारों को विकल्प ढूंढना मुश्किल हो सकता है. यूरोपीय आयोग के अनुसार, रूस कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और सॉलिड फॉसिल फ्यूल का मुख्य सप्लायर है.

क्या स्विफ्ट आर्थिक प्रतिबंधों से बाध्य है?
स्विफ्ट बेल्जियम और यूरोपीय संघ के नियमों से बाध्य है, जिसमें आर्थिक प्रतिबंध शामिल होंगे. SWIFT की वेबसाइट कहती है, "जबकि दुनिया भर के विभिन्न न्यायालयों में स्वतंत्र रूप से प्रतिबंध लगाए जाते हैं, SWIFT मनमाने ढंग से यह नहीं चुन सकता है कि कौन से अधिकार क्षेत्र का पालन करना है." मार्च 2012 में, यूरोपीय संघ ने स्विफ्ट को ईरानी फर्मों और व्यक्तियों की सेवा करने से रोक दिया था, जिन्हें तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के संबंध में स्वीकृत किया गया था. सूची में केंद्रीय बैंक और अन्य बड़े बैंक शामिल थे.

वित्त मंत्री ने बाजार में कार्टेलाइजेशन पर जताई चिंता, जानिये कैसे कार्टेल पहुंचाते हैं अर्थव्यवस्था को नुकसान

इस साल सीसीआई ने शिपिंग सेक्टर और टायर सेक्टर की कंपनियों पर कार्टेल बनाने के आरोप में कार्रवाई की थी. पिछले साल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीमेंट और स्टील सेक्टर के कार्टेल को लेकर चिंता जताई थी.

वित्त मंत्री ने बाजार में कार्टेलाइजेशन पर जताई चिंता, जानिये कैसे कार्टेल पहुंचाते हैं अर्थव्यवस्था को नुकसान

शुक्रवार को वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण में बाजार में मौजूद कार्टेल यानि गुटबंदी को लेकर चिंता जताई थी और इसे एक बड़ी चुनौती कहा. ऐसा पहली बार नहीं है कि सरकार ने कार्टेलाइजेशन (Cartelisation) पर सख्त बात कही हो. इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी यही चिंता जाहिर की थी. उन्होने सीमेंट और स्टील सेक्टर को आड़े हाथ लेते हुए कहा था कि इन सेक्टर में कार्टेल हैं और वो स्थितियों का फायदा उठा रहे हैं. नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने ये बात तब कही थी जब सीमेंट और स्टील कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा थी. फिलहाल महंगाई दर एक बार फिर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है. जिसकी वजह से सरकार इसके कारणों को समझने की कोशिश कर रही है. सरकार को आशंका है कि कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा कंपनियों के बीच सांठगांठ की वजह से भी हो सकता है. जानिए आखिर कार्टेल होता क्या है और ये बाजार को प्रभावित कैसे करता है.

क्या होता है कार्टेल

सीसीआई के मुताबिक कार्टेल का मतलब बाजार में उत्पादकों, विक्रेताओं, वितरकों या सेवा प्रदाताओं का ऐसा संगठन है जो आपसी समझौतों के माध्यम से सेवाओं वस्तुओं के उत्पादन, वितरण, बिक्री या मूल्य को नियंत्रित करता है. इस प्रक्रिया को कार्टेलाइजेशन कहते हैं. कार्टेल कोई घोषित संघ नहीं होता है ऐसे में बाजार में ये एक प्रतिद्वंदी के रूप में काम करते हैं. हालांकि आपसी रणनीति के तहत वो सप्लाई का स्तर या कीमतों का स्तर ऐसा तय कर देते हैं जिससे बिना लागत बढ़ाए कार्टेल में शामिल कंपनियों के लिए मुनाफा बढ़ जाता है. ऐसे मामलों में कार्टेल में शामिल सदस्य इसकी कोई शिकायत नहीं करते जिससे ये खेल सालों साल तक चल सकता है.

कार्टेल किसी भी बाजार के लिए इसलिए खतरनाक होता है क्योंकि कंपनियां उत्पाद में वैल्यूएड किए बिना ही मुनाफा बढ़ाने का तरीका खोज लेती हैं. इससे बाजार में विकास रुक सकता है. उदाहरण के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार में मुनाफा बढ़ाने के लिए कंपनियों को अपने उत्पाद को सुधारना होता है उसमें नए फीचर देने होते हैं या उसमें वैल्यू एड करना होता है जिसके बाद उसे नए नाम से अलग प्राइसिंग के साथ उतारना होता है. इससे प्रोडक्ट की रेंज बढ़ती है और ग्राहक के पास ज्यादा विकल्प बन जाते हैं पहला सामान्य उत्पाद और टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है दूसरा उसका एडवांस और थोड़ा महंगा विकल्प. हालांकि कार्टेल बनाकर कंपनियां इसी उत्पाद को बिना वैल्यूएड कर महंगा कर देते हैं, जिसके पीछे सप्लाई की कमी और महंगाई को वजह बताई जाती है. खास बात ये है कि सप्लाई की कमी भी कार्टेल के द्वारा ही गलत तरीके से दिखाई जाती है. ऐसे में ग्राहक एक ही उत्पाद या सर्विस पर बिना वजह ज्यादा पैसे चुकाते हैं. कार्टेल क्योंकि कंपटीशन से अलग हट जाते हैं इसलिए रिसर्च एंड डेवलमेंट की संभावना भी घट जाती है.

भारत में कब कब सामने आए कार्टेल के मामले

इसी साल जनवरी में सीसीआई ने समुद्री परिवहन टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है क्षेत्र में तीन कंपनियों और इंडीविजुवल्स के खिलाफ कार्टेल बना कर काम करने के मामले में 63 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है, सीसीआई ने 4 कंपनियों पर फैसला सुनाया था, हालांकि एक कंपनी पर जुर्माने को माफ कर दिया गया, सीसीआई के मुताबिक इन कंपनियों ने आपसी टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए सांठगांठ की थी.

वहीं फरवरी में सीसीआई ने 5 दिग्गज टायर कंपनियों पर कार्टेल बनाने के आरोप में 1788 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इसके साथ ही ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन पर भी कार्रवाई हुई थी. आरोप के मुताबिक इन सभी कंपनियों ने मिल कर खास टायरों की कीमतें बढ़ाई थीं.

वहीं पिछले साल ही सीसीआई ने बीयर बनाने वाली तीन कंपनियों के साथ साथ ऑल इंडिया ब्रूअर्स एसोसिएशन पर कार्टेलाइजेशन की वजह से करीब 900 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. सीसीआई के मुताबिक इन कंपनियों ने कीमतों को बढ़ाने और सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए कार्टेल बनाया था. ये कंपनियां आपस में योजना बना कर राज्यों में बियर के दाम बढ़ाने की रणनीति पर काम करती थीं. कंपनियों पर 2009 से 2018 के बीच कार्टेल बना कर काम करने का आरोप था

स्टॉक मार्केट और रुपये दोनों पर विदेशी संकेतों का दबाव, जानिए कैसे रहे आज के बाजार?

आज के कारोबार में शेयर बाजार के इंडेक्स और डॉलर के मुकाबले रुपया कारोबार के अंत में अपना कुछ नुकसान कवर करने में सफल रहे.

स्टॉक मार्केट और रुपये दोनों पर विदेशी संकेतों का दबाव, जानिए कैसे रहे आज के बाजार?

घरेलू बाजारों में आज विदेशी संकेतों की दबाव देखने को मिल रहा. आज के कारोबार में स्टॉक मार्केट और रुपये दोनों में ही कमजोरी देखने को मिली है. हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू स्टॉक मार्केट लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए. वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में भी आज कमजोरी देखने को मिली है. हालांकि खास बात ये है कि दोनो ही मार्केट में गिरावट सीमित ही दर्ज हुई. बाजार के एक्सपर्ट्स की माने तो फिलहाल घरेलू बाजारों को विदेशी संकेतों से दिशा मिल रही है. फिलहाल विदेशी बाजारों में अनिश्चितता है जिसका नुकसान घरेलू बाजारों को हो रहा है.

कहां पहुंचे घरेलू शेयर बाजार

ग्लोबल मार्केट में सुस्त रुख और ऑटो, फाइनेंस और पावर तथा ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में 400 से अधिक अंक लुढ़कने के बाद सेंसेक्स कुछ हद तक उबरते हुए 87.12 अंक या 0.14 प्रतिशत टूटकर 61,663.48 पर बंद हुआ. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 36.25 अंक या 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,307.65 पर बंद हुआ.

सेंसेक्स की कंपनियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर में सबसे अधिक 2.46 प्रतिशत की गिरावट आई. मारुति, बजाज फाइनेंस, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, आईटीसी और विप्रो के शेयर भी प्रमुख रूप से गिरावट में रहे. दूसरी तरफ, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, भारतीय स्टेट बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, घरेलू मोर्चे पर कोई ख़ास हलचल नहीं होने के कारण स्थानीय बाजार अब भविष्य की दिशा के लिए वैश्विक रुझान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. उन्होंने कहा, विकसित देशों के बाजारों में नकारात्मक रुझान और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आक्रामक टिप्पणियों ने दुनिया भर में चल रहे सकारात्मक रुझानों को प्रभावित किया है.

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कैसे रहे करंसी मार्केट

वहीं घरेलू शेयर बाजार में कमजोर रुख और कच्चे तेल कीमतों में तेजी आने के बीच अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया छह पैसे टूटकर 81.70 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ. सूत्रों ने कहा कि विदेशी बाजारों में डॉलर के कमजोर होने और ताजा विदेशी निवेश बढ़ने से रुपये में गिरावट सीमित रही. आज रुपया तेजी के साथ 81.59 पर खुला. कारोबार के दौरान रुपया 81.52 के दिन के उच्चस्तर और 81.78 के निचले स्तर को छूने के बाद अंत में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले छह पैसे की गिरावट के साथ 81.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. रुपया बृहस्पतिवार को 81.64 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की कमजोरी या मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.28 प्रतिशत घटकर 106.39 रह गया.

शेयर बाजार में भारी गिरावट: ब्रोकरेज हाउसेस ने निवेशकों को किया सतर्क, जानिए बॉन्ड मार्केट कैसे शेयर बाजार को कर रहा प्रभावित

शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में बढ़त और US-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते ग्लोबल मार्केट में भारी बिकवाली रही। BSE सेंसेक्स 1,939 अंकों की गिरावट के साथ 49,099.99 पर बंद हुआ है। इस दौरान BSE का मार्केट कैप 5.37 लाख करोड़ रुपए घटा।

ब्रोकिंग फर्म एम्के ग्लोबल के मुताबिक US बॉन्ड यील्ड में हालिया बढ़ोतरी से बाजार में बिकवाली है। इसमें आगे भी बढ़त की उम्मीद है, क्योंकि हालात को सामान्य बनाने के लिए बाइडेन प्रशासन राहत पैकेज को क्रमवार तरीके से जारी करेगी। यानी शेयर बाजार गिरावट जारी रह सकती है।

बॉन्ड बाजार का असर इक्विटी बाजार पर क्यों हुआ ?
दरअसल पूरी दुनिया में बांड बाजार इक्विटी बाजार से काफी बड़ा है। टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पैसे की कम लागत को बरकरार रखने का आश्वासन दिया है। इक्विटी निवेशक इस जोखिम से जाग गए हैं। यदि उधार लेने की लागत बढ़ जाती है, तो कंपनियों का डिस्काउंटेड कॅश फ्लो (DCF) मूल्य गिर जाएगा और इसका सीधा असर इक्विटी के प्राइस पर होगा। यह एक नेगेटिव एलिमेंट है, जो इक्विटी यानी शेयर बाजार में अब अपना प्रभाव दिखा रहा है।

निवेशकों के लिए ब्रोकरेड हाउसेस की सलाह

कोटक सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च हेड रस्मिक ओझा ने निवेशकों को चुनिंदा सेक्टर में खरीदारी की सलाह दी है। इसमें बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, कंस्ट्रक्शन, ऑयल एंड गैस, रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर शामिल हैं। क्योंकि इन सेक्टर के शेयर अर्थव्यवस्था में रिकवरी के साथ निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।

HDFC सिक्योरिटीज के दीपक जसानी कहते हैं कि निफ्टी 14,300 तक जा सकता है। बाजार की मौजूदा हालात के आधार पर बाजार में फिलहाल को बड़े उछाल की उम्मीद कम है। लेकिन बाजार में रिकवरी होगी, जिसकी गति धीमी होगी।

निर्मल बंग सिक्योरिटीज के सुनील जैन कहते हैं कि पिछली बार गिरावट में निफ्टी को हमने हजार अंक तक गिरते देखा था। आज यह 500 अंक गिरा है। हो सकता है कि इसमें आगे और गिरावट आए। टेक्नोलॉजी ने बाजार को कैसे प्रभावित किया है निवेशकों को निवेश करते समय इस तरह की गिरावट को ध्यान में रखना चाहिए।

विश्लेषकों के मुताबिक, बाजार की हाल की तेजी ठीक उसी तरह की है, जैसी दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखी गई थी। उस समय अमेरिकी सरकार ने काफी खर्च किया था और उसके बाद बाजार में भारी गिरावट आई थी। भारत में शेयर बाजार का वैल्यूएशन दोगुने पर है। हम इसमें और गिरावट देख सकते हैं। निफ्टी 14,300 तक जा सकता है।

US मार्केट में भारी बिकवाली

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के चलते प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। नैस्डैक इंडेक्स 478 अंकों की गिरावट के साथ 13,119 पर बंद हुआ था। इसी तरह डाओ जोंस 559 अंक और S&P 500 इंडेक्स 96 अंक नीचे बंद हुए।

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